मां लिंग भैरवी
लिंग भैरवी बहुत शक्तिशाली ऊर्जा का स्त्रैण स्वरूप हैं. ऐसे ऊर्जा-स्वरूप जो काफी दुर्लभ हैं.
ऐसे कुछ ऊर्जा-स्वरूप लिंग , जो कि स्त्रियोचित लिंग हैं. भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जहां योनि रूप स्थापित हैं. योनि यानी स्त्री जनन अंग को देवी मां की तरह पूजा जाता है. इस तरह के मंदिर पूरी दुनिया में हैं.
भारत में ऐसे बहुत सारे मंदिर हैं – कामाख्या मंदिर इनमें से एक है. लेकिन स्त्रियोचित ऊर्जा को लिंग के रूप में पूजना दुर्लभ है. ऐसे बहुत ही कम मंदिर हैं और वे भी सार्वजनिक जगहों पर नहीं हैं.
स्त्रियोचित ऊर्जा का यह सबसे तीव्र और प्रखर रूप है.
लिंग भैरवी की ऊर्जा मानव शरीर के तीन मूल चक्रों को मजबूती देती है जिससे इंसान का शरीर, मन और ऊर्जा प्रणाली स्थिर होते हैं।
जो लोग जीवन को गहराई में जीना चाहते हैं, देवी की मौजूदगी और कृपा इस प्रक्रिया में उनकी मदद करती है। आध्यात्मिक सुख चाहने वाले लोगों के लिए यह कृपालु देवी रास्ते की बाधाओं को दूर करती हैं और उन्हें परम मुक्ति तक पहुंचाती है।
लिंग भैरवी और संभोग शक्ति एक दूसरे से आत्मिक रूप से जुडे हैं। लिंगम् शक्ति के बिना संभोग संभव नही है। योनि, नारी शक्ति का ज्वालामुखी है जबकि लिंग, नर ऊर्जा का प्रचंड वेग है। सम्भोग क्रिया के द्वारा ही ये दोनों ऊर्जा एक हो जाती हैं और सृष्टि में नया सृजन करते हैं। सृष्टि मे सम्भोग और सृजन निरन्तर चलता रहता है। सम्भोग परमानन्द का क्षणिक भाग है और इसे आनन्द कहते हैं। जब ये आनन्द अनन्त हो जाता है तो परमानन्द कहलाता है। स्वयं को इस परमानन्द में स्थापित करना ही मोक्ष है।
जब कोई भी आत्मा परमानन्द में लीन होती है तो वो अन्तहीन आनन्द में डूब जाती है। वो सदैव सम्भोग में रत है। वो अनन्त सम्भोग में डुबी है। यही पुर्ण समाधि है। परमपुरुष प्रकृति के साथ सदैव सम्भोगरत है।
लिंग भैरवी लिंगम् शक्ति है। इस शक्ति के बिना सम्भोग का आनन्द प्राप्त नही किया जा सकता। नारी ऊर्जा, प्रेम और सम्भोग पर टिकी है। सम्भोग प्रेम का उच्चतम बिन्दु है।
जो नर, नारी को प्रेम और सम्भोग मे संतुष्ट नही कर सकता, नारी उसका त्याग कर देती है।
जो पुरूष, नारी को सम्भोग में पूर्ण संतुष्ट कर सकता है, नारी उसके वशीभूत रहती है।
नारी को नर ऊर्जा लिंग से सम्भोग क्रिया के द्वारा प्राप्त होती है। नारी सदैव प्रेम की भूखी है। नारी को प्रेम से ही अपने आधीन किया जाता है।
लिंग भैरवी की उपासना से लिंगम् शक्ति बढती है। ये नर ऊर्जा को और ज्यादा बलवान बना देती है जिससे नर, नारी को रति क्रिया में संतुष्ट कर, खुद भी लम्बे समय तक सम्भोग आनन्द प्राप्त करता है। लेकिन एक बात सदैव ध्यान रखें कि नारी भोग की वस्तु नही है बल्कि जननी है। याद रखिये कि आप स्वयं भी नारी से ही पैदा हुए है। नारी सदैव आदरणीय है।

लिंग भैरवी अर्पण: देवी स्थान में कई तरह के चढ़ावे चढ़ाए जाते हैं, जिससे कि श्रद्धालुओं को देवी की अनंत कृपा का लाभ मिल सकें।।
लिंग भैरवी स्तुति
जय भैरवी देवी गुरुभ्यो नमः श्री
जय भैरवी देवी स्वयम्भो नमः श्री
जय भैरवी देवी स्वधारिणी नमः श्री
जय भैरवी देवी महाकल्याणी नमः श्री
जय भैरवी देवी महाभद्राणि नमः श्री
जय भैरवी देवी महेश्वरी नमः श्री
जय भैरवी देवी नागेश्वरी नमः श्री
जय भैरवी देवी विश्वेश्वरी नमः श्री
जय भैरवी देवी सोमेश्वरी नमः श्री
जय भैरवी देवी दुख सम्हारी नमः श्री
जय भैरवी देवी हिरण्य गर्भिणी नमः श्री
जय भैरवी देवी अमृत वर्षिणी नमः श्री
जय भैरवी देवी भक्त-रक्षिणी नमः श्री
जय भैरवी देवी सौभाग्य दायिनी नमः श्री
जय भैरवी देवी सर्व जननी नमः श्री
जय भैरवी देवी गर्भ दायिनी नमः श्री
जय भैरवी देवी शून्य वासिनी नमः श्री
जय भैरवी देवी महा नंदिनी नमः श्री
जय भैरवी देवी वामेश्वरी नमः श्री
जय भैरवी देवी कर्म पालिनी नमः श्री
जय भैरवी देवी योनिश्वरी नमः श्री
जय भैरवी देवी लिंग रूपिणी नमः श्री
जय भैरवी देवी श्याम सुंदरी नमः श्री
जय भैरवी देवी त्रिनेत्रिनी नमः श्री
जय भैरवी देवी सर्व मंगली नमः श्री
जय भैरवी देवी महा योगिनी नमः श्री
जय भैरवी देवी क्लेश नाशिनी नमः श्री
जय भैरवी देवी उग्र रूपिणी नमः श्री
जय भैरवी देवी दिव्य कामिनी नमः श्री
जय भैरवी देवी काल रूपिणी नमः श्री
जय भैरवी देवी त्रिशूल धारिणी नमः श्री
जय भैरवी देवी यक्ष कामिनी नमः श्री
जय भैरवी देवी मुक्ति दायिनी नमः श्री
आओम महादेवी लिंग भैरवी नमः श्री
आओम श्री शाम्भवी लिंग भैरवी नमः श्री
आओम महा शक्ति लिंग भैरवी नमः श्री नमः श्री नमः श्री देवी नमः श्री
ऋण मुक्ति के लिए लिंग भैरवी साधना:-
ये साधना केवल उन व्यक्तियो के लीग है जो इस समय किन्ही भी कारणों से चारो तरफ से भारी ऋण से डूब गए है और जिनको कोई भी सही मार्ग नहीं मिल रहा है अपने ऋण को उतरने के लिए।ऐसे व्यक्ति इस साधना को करके खुद ही अपनी ज़िन्दगी को सही रस्ते पर आती हुई देख ले।ऋण मुक्ति कीअचूक और सटीक अघोर साधना:-
मैं जहां एक बहुत ही सरल
अनुभूत साधना प्रयोग दे
रहा हु आप निहचिंत हो कर
करे बहुत जल्द आप इस ऋण रूपी अभिशाप
… से मुक्ति पा लेंगे !
विधि –
शुभ दिन जिस दिन
रविपुष्य योग
हो जो रविवार हस्त नक्षत्र
हो शुक्ल पक्ष हो तो इस
साधना को शुरू करे
वस्त्र — लाल रंग की धोतीपहन सकते है !
माला – काले हकीक की ले !
दिशा –दक्षिण !
सामग्री – लिंग भैरवी यन्त्र का चित्र और हकीक
माला काले रंग की ! मंत्र संख्या – 12 माला 21
दिन करना है !
पहले गुरु पूजन कर आज्ञा लेऔर
फिर श्री गणेश
जी का पंचौपचार पूजन करे तद
पहश्चांत संकल्प ले की मैं माँ लिंग भैरवी आपकी शरण में आरहा हु मेरे कष्टो का निवारण करे।और मैं मेरे समस्त ऋण मुक्ति के लिए
यहसाधना कर रहा हु हे लिंगभैरवी
देवी मुझे ऋण मुक्ति दे!जमीन पे
थोरा रेत बिछा के उस उपर कुमकुम से तिकोण बनाएउस में एक
पलेट में स्वास्तिक बना कर उस
पे लालरंग का फूल रखे उस पे
लिंग भैरवी यन्त्र की स्थापना करे
उस यन्त्र का जा चित्र
लिंग भैरवी यन्त्र की स्थापना करे
उस यन्त्र का जा चित्र
का पंचौपचार से पूजन करे तेल का दिया लगाए और भोग के
लिए गुड रखे या लड्डू भी रख
सकते है ! मन को स्थिर रखते
हुये मन ही मन ऋण मुक्ति के
लिए पार्थना करे और जप
शुरूकरे 12 माला जप रोज करे इस प्रकार 21 दिन करे
साधना के बाद
सामग्री ,माला ,यन्त्र और
जो पूजन किया है वो सामान
जल प्रवाह कर दे साधना के
दौरान रविवार या मंगल वार को छोटे
बच्चो को मीठा भोजनआदि जरूर
कराये ! शीघ्र ही कर्ज से
मुक्ति मिलेगी और कारोबार
में प्रगति भी होगी !
मंत्र—
ॐ ऐं क्लीम ह्रीं लिंग लिंग लिंगभैरविः मम
ऋणविमोचनाये महां महा धन
प्रदाय क्लीम स्वाहा !!